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क्रांतिकारी कदम मानव समाज के लिए

एक तरीका जहॉ है आपार निश्चित संभावना है।  




 उपलब्ध

संभव और अन्नंत सम्भावनाएं 

जन -जन का विकास जनता का विकास
डिजिटल संसार

क्या आसान है और क्या कठिन यह प्रश्न है ,जिसका उत्तर पाना अर्थात समझना की क्या सही और क्यों गलत है।  गलत और सही को समझ कर , करना ही सफलता प्रदान करता ही है।  
आप पढ़ रहे है क्योंकि बात आकर्षक लग रही है तब तक या कब तक।  

आप सभी  का  स्वागत है। 

बात सरल है ,उन सब के लिए जो वास्तव में इस बात को समझकर, करने की चाहत रखते है , की आय बनाना या पाना , एक प्रक्रिया है।
आप क्या इस बात की समझ रखते है की 
क्या लाभ है? ,लोकतंत्र से। 
हाँ या नहीं।  आपका अपना मत है , जिसे आप कहना चाहे या नहीं , यह  आपकी इच्छा है। इच्छा है। 
इस बात पर विचार करने की 
" विकास से क्या अभिप्राय  है। "
क्या आप विकास का मतलब समझ पा रहे है ,की मन की बात से ही भर्मित हो रहे है और विकास का राग गा और सुन रहे है। क्या ऐसा विकास सब के लिए बेहतर नही होगा , जिससे मूलभूत जीवन उपयोगी वस्तुओं का दाम कम हो सके जिससे समाज के हर वर्ग  को वास्तविक लाभ मिल सके। इस बात को ही मानते ही रहना  की समय के महंगाई  बढ़ेगी और दाम भी तो यह समझने और जानने की नहीं है कि विकास कर रहे है या जनता पर विकास के नाम पर अतिरिक्त दबाओ दे रहे है। ऐसा विकास क्या सही है ,  जिससे रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में ही जनता लगी रहे। 
जन - जन प्रयासरत है और विकास पथ का पथिक है।देश के नागरिक ही सम्पन नहीं हो पाए तो ऐसा विकास आम जनता के लिए व्यर्थ है।  ऐसी राजनीति से क्या  फायदा जिसमे " सर्वजन हिताय सर्वजन  सुखाये " का भाव न हो।  ऐसा लोकतंत्र किस प्रकार लाभदायी हो सकता है , जिससे  सीमित   जनों का विकास हो।